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Bihar News: बिहार में 1.64 लाख करोड़ से बदलेंगी सड़कों की तस्वीर, 2424 किमी की परियोजनाओं को मंजूरी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में 2424 किलोमीटर की सड़क परियोजनाओं के लिए 1.64 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी। गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे और राम जानकी पथ पर भी जोर।

पटना, 17 अक्टूबर: बिहार में सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास की तैयारी है। केंद्र सरकार ने राज्य में कुल 2,424 किलोमीटर लंबाई की 32 सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं पर करीब 1,64,518 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजनाओं में राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास, सड़कों का चौड़ीकरण, बाईपास निर्माण और रेलवे ओवरब्रिज जैसी सुविधाएं शामिल हैं। <Cite refs={["turn191474news12","turn191474news13"]}/>


इन योजनाओं के पूरा होने पर बिहार के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है। खासकर उन इलाकों को लाभ मिल सकता है, जहां अभी भारी यातायात, लंबी दूरी या संकरी सड़कों के कारण लोगों को परेशानी होती है। हालांकि, परियोजनाओं का वास्तविक लाभ निर्माण की प्रगति और समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगा।


32 परियोजनाओं में दो विभागों की अहम भूमिका


वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं में बिहार के पथ निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की योजनाएं शामिल हैं।


उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पथ निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभाग से जुड़ी 18 परियोजनाओं की कुल लंबाई करीब 739 किलोमीटर है। इन पर लगभग 24,940 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, NHAI की 14 परियोजनाओं की लंबाई करीब 1,685 किलोमीटर है। इनके लिए लगभग 1,39,578 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है।


इन योजनाओं में कुछ मौजूदा सड़कों को बेहतर बनाने के साथ नई सड़क सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर है। इसका उद्देश्य केवल यात्रा को आसान बनाना नहीं, बल्कि शहरों, बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों और दूसरे राज्यों से संपर्क को मजबूत करना भी है।


गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से आठ जिलों को उम्मीद


प्रस्तावित सड़क नेटवर्क में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को बिहार के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इसकी कुल लंबाई करीब 568 किलोमीटर बताई गई है, जिसमें लगभग 417 किलोमीटर हिस्सा बिहार से गुजरने का उल्लेख है।


यह मार्ग पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज सहित आठ जिलों से जुड़ेगा। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। व्यापक क्षेत्रीय संपर्क के जरिए पूर्वोत्तर भारत की ओर सड़क यात्रा को भी सुविधा मिल सकती है।


एक्सप्रेसवे का लाभ केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। माल ढुलाई और व्यावसायिक परिवहन के लिए बेहतर सड़क संपर्क मिलने से कारोबारियों को भी फायदा हो सकता है। हालांकि, यात्रा समय में कितनी कमी आएगी, यह अंतिम मार्ग, प्रवेश-निकास व्यवस्था और निर्माण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।


राम जानकी पथ के तीसरे और चौथे हिस्से पर भी काम


बिहार में राम जानकी पथ का निर्माण भी सड़क संपर्क की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के पहले और दूसरे हिस्से पर काम चल रहा है। अब तीसरे और चौथे हिस्से को भी मंजूरी मिलने की बात सामने आई है।


इन दोनों हिस्सों पर करीब 8,600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। परियोजना के आगे बढ़ने से मार्ग से जुड़े क्षेत्रों में आवागमन सुगम होने के साथ धार्मिक पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।


राम जानकी पथ जैसे मार्गों का महत्व उन यात्रियों के लिए भी है, जो धार्मिक स्थलों और आसपास के शहरों के बीच नियमित यात्रा करते हैं। बेहतर सड़क संपर्क से छोटे व्यापारियों, परिवहन संचालकों और स्थानीय सेवा क्षेत्र को नए अवसर मिल सकते हैं।


NH-333A समेत दूसरी सड़कों के विकास पर जोर


योजनाओं में बरबीघा से झारखंड की दिशा में NH-333A के चौड़ीकरण और सुधार का काम भी शामिल बताया गया है। इसके अतिरिक्त दरभंगा-जयनगर और सीतामढ़ी-चिरौत सड़क को बेहतर बनाने, चार लेन की सड़कों तथा बाईपास विकसित करने जैसी योजनाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।


बाईपास बनने से शहरों के भीतर से गुजरने वाले भारी वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इससे जाम की समस्या घटाने और स्थानीय लोगों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने की संभावना रहती है। रेलवे ओवरब्रिज बनने से रेलवे क्रॉसिंग पर बार-बार रुकने वाली गाड़ियों की परेशानी भी कम हो सकती है।


रोजगार और कारोबार पर भी पड़ सकता है असर


सड़क निर्माण परियोजनाओं का प्रभाव यातायात तक सीमित नहीं रहता। निर्माण के दौरान मजदूरों, तकनीकी कर्मचारियों, मशीन ऑपरेटरों और निर्माण सामग्री की आपूर्ति से जुड़े कारोबार को काम मिलने की संभावना रहती है।


बेहतर सड़क संपर्क विकसित होने के बाद कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना, छोटे उद्योगों का माल भेजना और व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार करना आसान हो सकता है। पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों को भी बेहतर परिवहन सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।


हालांकि, इन संभावित लाभों को वास्तविक रूप देने के लिए जमीन अधिग्रहण, निर्माण की समयसीमा, गुणवत्ता और परियोजनाओं की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण होगी।


अब निर्माण की प्रगति पर रहेगी नजर


बिहार में 32 सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि अलग-अलग परियोजनाओं का काम कब शुरू होता है और उन्हें पूरा करने की समयसीमा क्या तय होती है।


यदि योजनाएं निर्धारित समय पर पूरी होती हैं, तो बिहार में लंबी दूरी की यात्रा, माल परिवहन और शहरों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे राज्य के आर्थिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।


यह भी पढ़ें: बिहार की अन्य प्रमुख विकास योजनाओं और सड़क परियोजनाओं की खबरें Alam Ki Khabar पर पढ़ें।

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